क्या है इस खबर में:

बिहार विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद, प्रवासी श्रमिकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे रोजगार की चुनौतियाँ सामने आ रही हैं।




पटना में बिहार विधानसभा चुनाव के बाद, राज्य में फिर से प्रवासी श्रमिकों का पलायन तेज हो गया है। यह स्थिति रोजगार के अभाव को दर्शाती है। छठ पूजा के बाद से, 77.6 लाख से अधिक लोग बिहार छोड़ चुके हैं, जिनमें से कई गोवा, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में काम की तलाश में जा रहे हैं।



पटना जंक्शन पर, प्रवासी श्रमिकों अमरजीत और राघुनंदन ने अपनी कठिनाइयों को साझा किया। उन्होंने कहा कि सरकार को बिहार में ही रोजगार देना चाहिए, ताकि उन्हें अपने घरों से बाहर नहीं जाना पड़े। रास्ते में कई लोग रोते हैं क्योंकि वे अपनी पत्नी, बच्चों और माता-पिता से दूर हो जाते हैं।



समस्तीपुर रेलवे डिवीजन के आंकड़ों के अनुसार, छठ के बाद के 15 दिनों में, लगभग 30.9 लाख यात्री केवल उत्तर बिहार और सीमांचल से निकले हैं, जो प्रतिदिन 2 लाख से अधिक यात्रियों का औसत है। पूरे बिहार में लगभग 6 लाख यात्री प्रतिदिन ट्रेनें पकड़ते हैं।



राघुनंदन ने ट्रेनों की भीड़भाड़ की स्थिति को बताया। उन्होंने कहा कि ट्रेनें इतनी भरी होती हैं कि उन्हें क्रैम्प स्पेस में यात्रा करनी पड़ती है। उन्होंने बदलाव की उम्मीद के साथ वोट देने आए थे, लेकिन फिर से नीतीश कुमार की सरकार बन गई।



पूर्व मध्य रेलवे ने चुनावों के बाद यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेष ट्रेनों का संचालन जारी रखा है। 29-30 अक्टूबर को, 14.3 लाख से अधिक यात्री बिहार छोड़ चुके हैं। हालांकि, प्रवासियों का कहना है कि उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं और रोजगार की कमी उन्हें राज्य छोड़ने पर मजबूर कर रही है।





संक्षेप:

  • बिहार विधानसभा चुनाव के बाद प्रवासी श्रमिकों का पलायन बढ़ा।

  • 77.6 लाख से ज्यादा लोग काम की तलाश में राज्य छोड़ चुके हैं।

  • समस्तीपुर रेलवे डिवीजन में प्रतिदिन 2 लाख से अधिक यात्री यात्रा कर रहे हैं।

  • ट्रेनों में भीड़भाड़ के कारण यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

  • सरकार ने विशेष ट्रेनों का संचालन शुरू किया है, लेकिन रोजगार की कमी बनी हुई है।



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