गोड्डा और पीरपैंती के बीच रेल लाइन बनने का इंतजार कर रहे लाखों लोगों के लिए बहुत अच्छी खबर सामने आई है। इस प्रोजेक्ट के रास्ते में आ रही जमीन अधिग्रहण की बड़ी दिक्कतें अब लगभग दूर हो गई हैं। रेलवे और प्रशासन ने मिलकर काम की रफ्तार बढ़ा दी है, जिससे 63 किलोमीटर लंबी इस लाइन का सपना अब हकीकत बनता दिख रहा है।
भागलपुर में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज
भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने हाल ही में कहलगांव में अधिकारियों के साथ बैठक की है। उन्होंने निर्देश दिया है कि पीरपैंती इलाके में, जहां करीब 8 किलोमीटर की लाइन गुजरनी है, वहां रोजाना कैंप लगाए जाएं। किसानों से वंशावली और एलपीसी (LPC) के आवेदन रोज़ाना लिए जा रहे हैं ताकि मुहावरे की राशि जल्द बांटी जा सके।
प्रोजेक्ट का पूरा लेखा-जोखा
यह रेलवे लाइन बिहार और झारखंड के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। इसके निर्माण पर भारी-भरकम राशि खर्च की जा रही है।
| कुल लंबाई | 62-63 किलोमीटर |
| अनुमानित लागत | 1393 करोड़ रुपये |
| पहला चरण | गोड्डा से महागामा (32 किमी) |
| दूसरा चरण | महागामा से पीरपैंती |
बाबा बटेश्वर से बाबा बैद्यनाथ का सीधा जुड़ाव
इस रेल लाइन के बनने से सबसे बड़ा फायदा श्रद्धालुओं को होगा। कहलगांव के पास बाबा बटेश्वर स्थान और देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम के बीच सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने इसे इलाके के लिए वरदान बताया है। इससे न केवल तीर्थयात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि रेलवे को माल ढुलाई में भी बड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है।
कब तक पूरा होगा काम?
रेलवे ने इस प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांटा है। महागामा से पीरपैंती के बीच के हिस्से को पूरा करने का लक्ष्य 2027 तक रखा गया है। झारखंड सरकार ने भी अपने हिस्से की 150 एकड़ जमीन रेलवे को सौंप दी है, जिससे गोड्डा की तरफ भी काम में तेजी आई है। टेंडर की प्रक्रिया और सिविल वर्क पर भी रेलवे का पूरा जोर है।






