उत्तर प्रदेश के मऊ में तैनात फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग के सहायक क्लर्क गगन सिंह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। गोरखपुर विजिलेंस की टीम ने गुरुवार को बिहार और झारखंड में उनके पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच में पता चला है कि सरकारी नौकरी करते हुए गगन सिंह ने अपनी आय से करीब 300 गुना ज्यादा संपत्ति जमा कर ली थी। अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।
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जांच में कहां-कहां मिली संपत्ति?
विजिलेंस की टीम ने जब दस्तावेजों को खंगाला तो कई बेनामी संपत्तियों का पता चला। टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से भागलपुर, बांका और देवघर में छापेमारी की जहां करोड़ों की जमीन और मकान मिले हैं। इनमें से कई संपत्तियां उनके रिश्तेदारों के नाम पर हैं।
- भागलपुर: शहर के सत्यम अपार्टमेंट में साल 2019 में पत्नी नीतू सिंह के नाम पर 35 लाख रुपये का फ्लैट खरीदा गया था।
- बांका: यहां एक विशाल बिल्डिंग मिली है जिसमें 12 फ्लैट बने हैं और 10 किराएदार रहते हैं। इसके अलावा देवघर मार्केट इलाके में एक बड़ा गोदाम भी मिला है।
- देवघर (झारखंड): कालिका विहार इलाके में बहन के नाम पर बना एक चार मंजिला मकान मिला है।
कितनी है असली कमाई और कितना मिला काला धन?
विजिलेंस विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक गगन सिंह की कुल वैध कमाई और बचत मिलाकर लगभग 1.30 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी। लेकिन जब उनकी संपत्तियों और खर्चों का हिसाब लगाया गया तो यह आंकड़ा 17 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अधिकारियों के अनुसार यह उनकी असली कमाई से 15.70 करोड़ रुपये ज्यादा है। छापेमारी के दौरान टीम को भारी मात्रा में गहने, कैश और जमीन के कागज भी मिले हैं, जिनकी जांच अभी चल रही है।






