बिहार में गंगा नदी की तर्ज पर अब छह और नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने पटना में अधिकारियों के साथ बैठक कर काम में तेजी लाने का निर्देश दिया है। सरकार का मकसद है कि सड़क और रेल की तरह नदियों के रास्ते भी सस्ता और आसान ट्रांसपोर्ट आम लोगों और व्यापारियों को मिले। इसके लिए राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है और अधिकारियों को जमीन से जुड़े मामले तुरंत सुलझाने को कहा गया है।

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किन नदियों और शहरों में होगा यह काम

गंगा (NW-1) के अलावा अब गंडक, कोसी, घाघरा, कर्मनाशा, पुनपुन और सोन नदी को जलमार्ग बनाया जा रहा है। इन सभी नदियों में जलमार्ग की कुल लंबाई 1187 किलोमीटर होगी। जहाजों के रुकने और माल चढ़ाने-उतारने के लिए 17 नई कम्युनिटी जेटी बनाई जा रही हैं। इसमें बेगूसराय का सिमरिया घाट, पटना का एनआईटी और अयोध्या घाट, भागलपुर का कहलगांव और सोनपुर शामिल है। बक्सर, भागलपुर और दरभंगा में ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट भी खुलेंगे ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले।

सड़क के मुकाबले कितना सस्ता पड़ेगा सफर

नदी के रास्ते सामान भेजना सड़क और ट्रेन के मुकाबले काफी सस्ता है। आंकड़ों के मुताबिक, जलमार्ग से ढुलाई का खर्च सड़क के मुकाबले आधे से भी कम है। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में कार्गो ट्रांसपोर्ट 0.83 लाख टन से बढ़कर 12.22 लाख टन हो गया है। व्यापारियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ‘जलवाहक योजना’ में बदलाव कर रही है, जिससे अब 300 किमी की जगह 100 किमी की दूरी पर भी सब्सिडी का लाभ मिल सकेगा।

माध्यम खर्च (प्रति टन-किमी)
जलमार्ग (Waterways) ₹1.3
रेलवे (Railways) ₹2.41
सड़क (Roads) ₹3.62

कालूघाट टर्मिनल की क्षमता अब सालाना 77,000 कंटेनर संभालने की हो गई है। सरकार प्रदूषण कम करने के लिए हाइब्रिड इलेक्ट्रिक जहाज भी लाने की तैयारी में है जो बैटरी और ईंधन दोनों पर चलेंगे।

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