बिहार में जीविका दीदियों ने लेन-देन के मामले में एक बड़ी मिसाल पेश की है। स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं ने रोजगार के लिए बैंकों से कुल 62,628 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसमें से उन्होंने समय पर 61,751 करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं। यह वापसी दर 98.6 प्रतिशत से भी ज्यादा है, जो वित्तीय अनुशासन को साफ तौर पर बयां करता है।

कर्ज वापसी और बचत के आंकड़े क्या कहते हैं?

बैंकों का पैसा लौटाने में जीविका दीदियों का रिकॉर्ड काफी बेहतर रहा है। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इनका NPA (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) सिर्फ 1.40 प्रतिशत है, जिसे इस साल 1 प्रतिशत से नीचे लाने की तैयारी है। बैंकिंग के क्षेत्र में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए 6,460 बैंक सखियों ने गांव-गांव में 19,955 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन कराया है।

वित्तीय स्थिति एक नजर में:

कुल कर्ज लिया गया ₹62,628 करोड़
कुल कर्ज लौटाया गया ₹61,751 करोड़
वापसी दर (Repayment Rate) 98.6%
एनपीए (NPA) 1.40%
खुले बचत खाते 10.47 लाख

2026 तक कितनी दीदी बनेंगी लखपति?

सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक 50.21 लाख जीविका दीदियों को ‘लखपति दीदी’ बनाया जाए। अभी तक राज्य में 31.71 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, यानी उनकी सालाना कमाई एक लाख रुपये से ज्यादा है। इस साल के अंत तक यह आंकड़ा 38 लाख तक ले जाने की योजना है। इसके लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मदद और ट्रेनिंग दी जा रही है।

बजट में क्या खास है और आगे की क्या योजना है?

हाल ही में आए केंद्रीय बजट 2026 में भी लखपति दीदी योजना को बढ़ावा देने की बात कही गई है। अब क्लस्टर लेवल पर ‘She Marts’ खोले जाएंगे ताकि महिलाएं अपना सामान सीधे बेच सकें। वहीं, बिहार में अगले वित्त वर्ष में 55,000 नए SHG खाते खोलने और 1.5 लाख महिलाओं को व्यक्तिगत कर्ज देने का प्लान है। गांवों में बैंकिंग सुविधा बढ़ाने के लिए 400 और नई बैंक सखी भी जल्द ही काम शुरू करेंगी।

Leave a comment