बिहार सरकार ने जमीन से जुड़े मामलों पर बड़ा फैसला लिया है। अब सरकारी जमीन पर 30 साल या उससे अधिक समय से कब्जा जमाए बैठे लोगों को राहत नहीं मिलेगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ कर दिया है कि सरकारी जमीन पर पुराना कब्जा भी अतिक्रमण ही माना जाएगा। विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि सरकारी जमीनों को जल्द से जल्द खाली कराया जाए। यह आदेश उन लोगों के लिए झटका है जो लंबे समय से सरकारी जमीन पर बिना किसी वैध कागजात के रह रहे हैं।

ℹ: बांका पुलिस ने Tata Indigo कार से पकड़ी विदेशी शराब, भागलपुर का तस्कर हुआ गिरफ्तार

पुराने सर्वे के आधार पर होगी कार्रवाई

सरकार ने तय किया है कि जमीन की असली पहचान 1890 से 1920 के बीच हुए कैडस्ट्रल सर्वे (Cadastral Survey) से होगी। अगर उस पुराने सर्वे में कोई जमीन ‘सरकारी’, ‘सैरत’ या ‘गैरमजरुआ’ दर्ज है, तो आज भी उसे सरकारी संपत्ति ही माना जाएगा। कई जगहों पर बाद के रिविजनल सर्वे में गलती से सरकारी जमीन किसी निजी व्यक्ति के नाम पर चढ़ गई थी। अब सरकार ने साफ किया है कि ऐसी गलतियों को सुधारा जाएगा और जमीन का मूल स्वभाव नहीं बदलेगा। जिनके पास बंदोबस्ती का कोई पक्का सरकारी आदेश नहीं है, उन्हें जमीन छोड़नी होगी।

पुलिस की दखलअंदाजी पर लगी रोक

इस आदेश में पुलिस की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। नए नियम के मुताबिक, पुलिस अब किसी भी जमीन विवाद या निर्माण कार्य में अपनी मर्जी से दखल नहीं दे सकती है। जब तक सक्षम राजस्व अधिकारी या कोर्ट का कोई लिखित आदेश नहीं आता, पुलिस किसी को दीवार बनाने या जमीन पर कब्जा लेने से नहीं रोक सकती। पुलिस का काम सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखना होगा। दरभंगा के डीएम द्वारा जमीन के तकनीकी पेंच पर मार्गदर्शन मांगने के बाद विभाग ने यह सख्त गाइडलाइन पूरे बिहार के लिए जारी की है।


Puja Kanjani Covers Bhagalpur Local Updates and Bihar Level Important News. Ex Jagran Media and IndiaTV Journalist.

Leave a comment