बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भागलपुर को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान देने की बात उठी है। भागलपुर के विधायक रोहित पांडेय ने सदन में तारांकित प्रश्न के जरिए शहर को ‘एजुकेशन सिटी’ के रूप में विकसित करने की मांग रखी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि पूर्वी बिहार के छात्रों की सुविधा के लिए यहाँ उच्च और तकनीकी शिक्षा का विस्तार किया जाए ताकि युवाओं को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में न जाना पड़े।
क्यों जरूरी है एजुकेशन सिटी बनाना?
विधायक रोहित पांडेय ने सदन में बताया कि पूर्वी बिहार और खास तौर पर भागलपुर प्रमंडल में उच्च शिक्षा के पर्याप्त संस्थान नहीं हैं। इस कारण बड़ी संख्या में छात्र मजबूरी में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं। इससे न केवल ‘ब्रेन ड्रेन’ होता है, बल्कि छात्रों के परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ भी पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि भागलपुर में पहले से ही ट्रिपल आईटी (IIIT), बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) और इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे बड़े संस्थान मौजूद हैं। अगर सरकार थोड़ा ध्यान दे, तो इस शहर को एक एजुकेशन हब या आईटी हब के रूप में आसानी से विकसित किया जा सकता है।
सरकार की क्या है तैयारी और बजट?
इस मांग के बीच सरकार ने भी शिक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात निश्चय-3 के तहत घोषणा की है कि जुलाई 2026 से राज्य के 213 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू हो जाएगी। वित्त मंत्री ने भी बजट भाषण में ‘एजुकेशन सिटी’ की अवधारणा का जिक्र किया है।
- कुल शिक्षा बजट: सरकार ने शिक्षा क्षेत्र के लिए 68,216 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो कुल बजट का सबसे बड़ा हिस्सा है।
- उच्च शिक्षा: सिर्फ उच्च शिक्षा विभाग को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 8,012 करोड़ रुपये मिले हैं।
- छात्रों के लिए सुविधा: स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिए 4 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण मिलता रहेगा।
- संस्थानों का चयन: पटना यूनिवर्सिटी और एलएनएमयू दरभंगा को मॉडल अपग्रेड के लिए 100-100 करोड़ रुपये दिए गए हैं।






