सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जन सुराज पार्टी की उस याचिका को सुनने से मना कर दिया जिसमें 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द करने की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमलिया बागची की बेंच ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव हारने के बाद पब्लिसिटी के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना सही नहीं है और यह याचिका विचार करने योग्य नहीं है।
जन सुराज ने कोर्ट में क्या दलील दी थी?
Prashant Kishor की पार्टी जन सुराज ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया था कि बिहार सरकार ने चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता का पालन नहीं किया। उनका कहना था कि ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत करीब 1.56 करोड़ महिला वोटरों को पैसे बांटे गए, जिससे चुनाव की निष्पक्षता खत्म हो गई। पार्टी ने दावा किया कि यह एक तरह का भ्रष्ट चुनावी तरीका था, इसलिए 243 सीटों पर हुए पूरे चुनाव को रद्द करके फिर से वोटिंग करानी चाहिए।
जजों ने सुनवाई के दौरान क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने याचिकाकर्ता से सीधा सवाल पूछा कि उन्हें चुनाव में आखिर कितने वोट मिले हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब जनता किसी पार्टी को पूरी तरह नकार देती है, तो वे अपनी हार को छिपाने के लिए न्यायिक प्रणाली का सहारा लेने आ जाते हैं। जजों ने इसे कानूनी शिकायत के बजाय पब्लिसिटी का तरीका बताया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर किसी उम्मीदवार को दिक्कत है तो वह अलग से इलेक्शन पेटीशन दायर कर सकता है, लेकिन इस तरह रिट याचिका के जरिए पूरे चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती।






