बिहार सरकार के सामने वित्तीय मामलों को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ विपक्ष सरकार पर घोटाले का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी तरफ सीएजी (CAG) की रिपोर्ट में हजारों करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिलने की बात कही गई है। यह मामला अब पटना हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है और विपक्ष ने इसे लेकर तीखे सवाल उठाए हैं।

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70 हजार करोड़ का हिसाब-किताब कहां है?

सीएजी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार सरकार ने करीब 70,877 करोड़ रुपये के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilisation Certificates) जमा नहीं किया है। नियम के अनुसार, जब भी सरकार को किसी काम के लिए पैसा मिलता है, तो 18 महीने के अंदर यह बताना होता है कि पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ। रिपोर्ट बताती है कि मार्च 2024 तक लगभग 49,649 प्रमाण पत्र जमा नहीं किए गए हैं, जिससे पैसों के सही इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं।

किन विभागों में सबसे ज्यादा पैसा फंसा है?

सबसे ज्यादा हिसाब पंचायती राज और शिक्षा विभाग का बाकी है। आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि कई विभागों ने सालों से अपने खर्च का ब्यौरा नहीं दिया है। नीचे दी गई टेबल में आप देख सकते हैं कि किस विभाग पर कितना हिसाब बाकी है:

विभाग का नाम बकाया राशि (करोड़ में)
पंचायती राज (Panchayati Raj) ₹28,154.10
शिक्षा विभाग (Education) ₹12,623.67
नगर विकास (Urban Development) ₹11,065.50
ग्रामीण विकास (Rural Development) ₹7,800.48
कृषि (Agriculture) ₹2,107.63

हाई कोर्ट और सीएजी ने क्या कहा?

इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है, जहां याचिकाकर्ता ने जांच की मांग की है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर आशंका जताई है कि जब तक पैसे के खर्च का प्रमाण नहीं मिलता, तब तक पैसों की हेराफेरी या गबन का खतरा बना रहता है। ट्रेजरी कोड के नियमों का पालन नहीं होने से वित्तीय अनुशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल कोर्ट ने सरकार को डिटेल रिपोर्ट देने के लिए समय दिया है।


Puja Kanjani Covers Bhagalpur Local Updates and Bihar Level Important News. Ex Jagran Media and IndiaTV Journalist.

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