भागलपुर समाहरणालय में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग के कामकाज की गहरी समीक्षा की है। बैठक के दौरान DM साहब ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि शहर से लेकर गांव तक चल रहे अवैध और मानकविहीन निजी क्लीनिकों पर तुरंत छापेमारी की जाए।
लापरवाही करने वाले कर्मियों पर कार्रवाई और वेतन रोका
समीक्षा बैठक में काम में कोताही बरतने वाले कर्मियों पर गाज गिरी है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (High Risk Pregnancy) की पहचान सही से नहीं करने पर जिला सामुदायिक प्रेरक (DCM) का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा, मातृ मृत्यु के मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने साफ कहा कि अगर किसी ANM या आशा कार्यकर्ता की लापरवाही सामने आती है, तो उन पर कड़ी कार्रवाई होगी। प्रखंड स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं के चयन में देरी पर भी नाराजगी जताई गई है और इसे जल्द पूरा करने को कहा गया है।
सरकारी अस्पतालों का रिपोर्ट कार्ड और टीबी जांच के नए नियम
बैठक में ‘भाव्या स्कैन एंड शेयर’ और मरीजों की जांच के आंकड़े भी पेश किए गए। जिलाधिकारी ने नाथनगर रेफरल अस्पताल के प्रदर्शन (81%) को सबसे कम बताते हुए सुधार के निर्देश दिए। वहीं, यक्ष्मा (TB) उन्मूलन के लिए नया टारगेट सेट किया गया है, जिसके तहत अब OPD में आने वाले कम से कम 3% मरीजों की टीबी जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी।
भाव्या स्कैन एंड शेयर प्रगति रिपोर्ट:
| संस्थान का नाम | उपलब्धि प्रतिशत |
|---|---|
| जिला औसत | 94% |
| सीएचसी रंगराचक | 88% |
| नाथनगर रेफरल अस्पताल | 81% |
सदर अस्पताल के SNCU (नवजात शिशु देखभाल इकाई) में क्षमता से कम बच्चे भर्ती होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। वर्तमान में यहाँ केवल 75% क्षमता का उपयोग हो रहा है, जिसे 100% करने का निर्देश दिया गया है ताकि जरूरतमंद बच्चों को इलाज मिल सके।






