भागलपुर में मेट्रो रेल परियोजना का काम अब जमीनी स्तर पर शुरू हो गया है। 19 फरवरी 2026 से शहर में आधिकारिक तौर पर सर्वे का काम आरंभ कर दिया गया है। Roadies Survey and Data Services Private Limited की टीम ने नाथनगर, अलीगंज और सबौर जैसे इलाकों में डेरा डाल दिया है। यह ‘बेस मैप सर्वे’ अगले 20 से 25 दिनों तक चलेगा। इसका मुख्य मकसद पूरे रास्ते का एक डिजिटल नक्शा तैयार करना है, ताकि मेट्रो लाइन बिछाते समय यह पता रहे कि जमीन की ऊंचाई क्या है और कहाँ पिलर लगाना सही रहेगा।
भागलपुर मेट्रो का रूट और स्टेशन कैसे होंगे?
इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 22 स्टेशन बनाए जाएंगे जो शहर के दो मुख्य हिस्सों को जोड़ेंगे। पहला कॉरिडोर पूर्व-पश्चिम दिशा में चंपानगर से सबौर तक लगभग 17 किलोमीटर लंबा होगा। वहीं, दूसरा कॉरिडोर उत्तर-दक्षिण दिशा में भागलपुर स्टेशन से वास्तु विहार तक करीब 12 किलोमीटर का होगा। भागलपुर जंक्शन इन दोनों लाइनों का मुख्य केंद्र बनेगा, जहाँ से यात्री अपनी ट्रेन बदल सकेंगे।
- Blue Line: भागलपुर से वास्तु विहार (वाया मोजाहिदपुर, महेशपुर)।
- Green Line: नाथनगर से तातारपुर (वाया चंपानगर)।
- Red Line: भागलपुर बस स्टैंड से बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी।
मेट्रो यार्ड और लागत का क्या है पूरा प्लान?
सर्वे टीम जमीन के नीचे मौजूद पानी, बिजली और सीवरेज की लाइनों का भी पता लगा रही है ताकि खुदाई के समय उन्हें नुकसान न हो। मेट्रो ट्रेनों को खड़ा करने और रखरखाव के लिए ‘मेट्रो यार्ड’ की जरूरत होगी, जिसके लिए जगदीशपुर और यूनिवर्सिटी क्षेत्र में जमीन तलाशी जा रही है। पहले फेज का कुल खर्च लगभग 5,900 करोड़ रुपये आंका गया है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार 20-20 प्रतिशत पैसा देंगी, जबकि बाकी 60 प्रतिशत लोन के जरिए जुटाया जाएगा। प्रशासन की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा सरकारी जमीन का ही इस्तेमाल हो ताकि लोगों के घरों पर असर न पड़े।






