भागलपुर के लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। उत्तर भारत का पहला आदियोगी शिव मंदिर और विशाल योग केंद्र अब भागलपुर में बनने जा रहा है। सद्गुरु जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन ने इसके लिए ठोस पहल शुरू कर दी है। बिहार पर्यटन विभाग ने भी इस प्रोजेक्ट में काफी रुचि दिखाई है और भागलपुर जिला प्रशासन से जमीन की उपलब्धता को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस मंदिर के बनने से भागलपुर में पर्यटन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
प्रोजेक्ट से जुड़ी खास बातें और जमीन की जरूरत
ईशा फाउंडेशन इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 120 एकड़ जमीन की तलाश कर रहा है। विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार जमीन की लीज 99 साल के लिए होगी।
- योग केंद्र के निर्माण के लिए करीब 100 एकड़ जमीन की जरूरत है।
- आदियोगी शिव की 112 फीट ऊंची प्रतिमा के लिए 10 से 20 एकड़ जमीन अलग से चाहिए।
- यह प्रतिमा कोयंबटूर और बेंगलुरु में स्थापित प्रतिमाओं जैसी ही होगी।
- पर्यटन विभाग के सचिव नीलेश रामचंद्र देवरे ने भागलपुर डीएम को जमीन चिन्हित करने का निर्देश दिया है।
- सभी अंचल अधिकारियों को जमीन तलाशने के लिए पत्र भेजे जा रहे हैं।
भागलपुर को इस मंदिर से क्या होगा फायदा
इस केंद्र के बनने के बाद भागलपुर का नाम अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन के नक्शे पर आ जाएगा। इससे आम जनता को कई बड़े फायदे मिलने की संभावना है।
| सुविधा/फायदा | विवरण |
|---|---|
| पर्यटन | सालाना करीब एक करोड़ पर्यटकों के आने की संभावना है |
| रोजगार | निर्माण और संचालन के दौरान हजारों स्थानीय लोगों को काम मिलेगा |
| सुविधाएं | केंद्र में ध्यान कक्ष और योग विज्ञान की शिक्षा दी जाएगी |
| ऊंचाई | प्रतिमा की 112 फीट ऊंचाई योग के 112 मार्गों का प्रतीक होगी |
5 अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ईशा फाउंडेशन और सरकार के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत अंतिम चरणों में है। इससे पहले पटना में इस प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा हुई थी लेकिन जमीन की समस्या के कारण अब भागलपुर और अन्य जिलों पर ध्यान दिया जा रहा है। फाउंडेशन का मकसद लोगों को उनके आंतरिक कल्याण और स्वास्थ्य के लिए तैयार करना है।






