बिहार के सीमांचल, कोसी और मिथिलांचल क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए रेल सुविधाओं को बढ़ाने की बात चल रही है। अररिया और दरभंगा के रास्ते राजधानी एक्सप्रेस चलाने या नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। यात्री संगठनों और कई नेताओं ने मिलकर इस मुद्दे को उठाया है ताकि इस इलाके के लोगों को लंबी दूरी की यात्रा में आसानी हो सके।

क्या है पूरा प्रस्ताव और मांग

स्थानीय लोगों और यात्री संघों ने रेलवे के सामने मुख्य रूप से दो बातें रखी हैं। जोगबनी, फारबिसगंज और अररिया के लोगों को अभी राजधानी एक्सप्रेस पकड़ने के लिए कटिहार जाना पड़ता है, जिसमें काफी समय लगता है। इसे ध्यान में रखते हुए ये सुझाव दिए गए हैं:

  • रूट बदलने की मांग: डिब्रूगढ़ और नई दिल्ली के बीच अभी जो तीन राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनें गुवाहाटी और कटिहार होकर चलती हैं, उनमें से किसी एक का रास्ता बदलने की मांग की गई है। प्रस्ताव है कि सप्ताह में एक या दो दिन इसे सिलीगुड़ी, ठाकुरगंज, अररिया, फारबिसगंज और दरभंगा के रास्ते चलाया जाए।
  • नई ट्रेन का विकल्प: अगर पुरानी ट्रेन का रास्ता बदलना संभव नहीं हो, तो इस नए रूट पर सप्ताह में दो दिन चलने वाली एक नई राजधानी एक्सप्रेस या वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू की जाए।

सांसदों का समर्थन और अभी की स्थिति

इस मांग को लेकर कई बड़े लोग और संस्थाएं आगे आई हैं। इंडो-नेपाल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ रेल यूजर्स और बिहार डेली पैसेंजर्स एसोसिएशन जैसे संगठन इसके लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। सुपौल के सांसद दिलेश्वर कामत ने रेलवे कमिटी में यह प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही अररिया, दरभंगा, झंझारपुर और समस्तीपुर के सांसदों से भी इस मांग को मजबूती से उठाने का आग्रह किया गया है।

हालांकि, अभी तक रेल मंत्रालय या रेलवे बोर्ड की तरफ से इस पर कोई पक्का जवाब नहीं आया है। यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है और इस पर फैसला होना बाकी है। रेलवे अभी देशभर में वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें लाने की तैयारी कर रहा है, जो राजधानी एक्सप्रेस जैसी ही सुविधाएं देंगी। अगर इस रूट को मंजूरी मिलती है, तो यह इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात होगी।

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