भागलपुर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुविधा को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (JLNMCH) के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर राजकमल चौधरी ने नया आदेश जारी किया है। अब अगर कोई डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बजाय बाहर की दवा लिखता है, तो उसका एक दिन का वेतन काट लिया जाएगा।

JLNMCH में डॉक्टरों के लिए क्या हैं नए नियम?

अस्पताल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मरीजों के परिजनों को बिना बताए बाहर से दवा लाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके अलावा डॉक्टरों को कुछ अन्य कड़े निर्देशों का पालन भी करना होगा।

  • सैलरी में कटौती: बाहर की दवा या जांच लिखने वाले डॉक्टरों पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
  • ड्यूटी का समय: कोई भी डॉक्टर तब तक अपनी पोस्ट नहीं छोड़ेगा जब तक उसका रिलीफ डॉक्टर वहां नहीं पहुंच जाता।
  • ड्रेस कोड: सभी स्वास्थ्य कर्मियों और अधिकारियों के लिए ड्यूटी के दौरान यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • अस्पताल में जांच: मरीजों की सभी जरूरी जांच अस्पताल के अंदर या अधिकृत St. Pius Lab के माध्यम से ही करानी होगी।

सदर अस्पताल में निरीक्षण के दौरान मिलीं कौन सी खामियां?

डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर (DDC) प्रदीप कुमार सिंह ने गुरुवार को सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मरीजों की परेशानियों को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को जमकर फटकार लगाई।

समस्या अधिकारी का निर्देश
कम दवा देना डॉक्टर द्वारा लिखी गई 90 दिन की दवा पूरी दी जाए, 30 दिन की नहीं।
लंबा इंतजार प्लास्टर रूम के बाहर मरीजों की भीड़ कम की जाए और बैठने की व्यवस्था हो।
प्राइवेट रेफरल मरीजों को प्राइवेट क्लीनिक या अस्पताल में रेफर करने पर पूरी तरह रोक।

DDC ने पाया कि दवा काउंटर पर स्टाफ मनमानी कर रहे थे और मरीजों को पूरी दवा नहीं दे रहे थे। हालांकि, उन्होंने यह भी देखा कि अधिकांश डॉक्टर अपने चेंबर में मौजूद थे और रेडियोलॉजी व पैथोलॉजी विभाग सही तरीके से काम कर रहे थे।

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