भागलपुर रूट पर अब 130 की रफ़्तार से दौड़ेगी ट्रेन, रेलवे ने 17 फाटक बंद करने का लिया फैसला

Hariom Mishra26 February 20262 min read15 viewsCity Local
भागलपुर रूट पर अब 130 की रफ़्तार से दौड़ेगी ट्रेन, रेलवे ने 17 फाटक बंद करने का लिया फैसला

भागलपुर और साहिबगंज रूट पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। रेलवे ने बरहरवा से किऊल के बीच ट्रेनों की गति बढ़ाने का काम तेज कर दिया है। अब इस रूट पर ट्रेनें 110 किलोमीटर प्रति घंटे की जगह 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। स्पीड बढ़ाने के लिए रेलवे ट्रैक के बीच आने वाली रुकावटों को हटा रहा है। इसी क्रम में बरहरवा से किऊल के बीच कुल 17 रेलवे फाटक (Level Crossings) को हमेशा के लिए बंद करने का फैसला लिया गया है। इन फाटकों की जगह पर यात्रियों के लिए आधुनिक सबवे बनाए जाएंगे।

किन जगहों पर बंद होंगे फाटक और कैसी होगी नई व्यवस्था?

रेलवे ने उन 17 जगहों की पहचान कर ली है जहां फाटक हटाकर अंडरपास बनाए जाने हैं। इसमें नाथनगर-अकबरनगर, घोघा-लैलख, सुल्तानगंज-गंगानिया, जमालपुर-दशरथपुर और अभयपुर-कजरा के बीच के सेक्शन शामिल हैं। साहिबगंज-बरहरवा सेक्शन में भी कुछ फाटक बंद होंगे। अक्सर देखा जाता है कि अंडरपास में बरसात का पानी जमा हो जाता है, जिससे लोगों को परेशानी होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए रेलवे इस बार टीन की छत वाले सबवे बना रहा है।

इन नए सबवे में पानी निकासी (ड्रेनेज) की पक्की व्यवस्था होगी ताकि बारिश में भी रास्ता चालू रहे। साथ ही रात में आने-जाने वालों की सुरक्षा के लिए अच्छी रोशनी का इंतजाम भी किया जाएगा। सबवे के लिए कंक्रीट के बॉक्स बनकर तैयार हैं और उन्हें लगाने का काम जल्द शुरू होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3.5 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

यात्रियों को कितना समय बचेगा और वंदे भारत स्लीपर का क्या है प्लान?

जब यह काम 2026 में पूरा हो जाएगा, तो भागलपुर से पटना और हावड़ा के बीच का सफर 20 से 30 मिनट कम हो जाएगा। मालदा डिवीजन के अधिकारियों ने बताया है कि यह तैयारी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को इस रूट पर चलाने के लिए की जा रही है। ट्रैक को मजबूत बनाने के लिए पटरियों पर पुराने स्विच हटाकर नए ‘थिक वेब स्विच’ लगाए जा रहे हैं। इससे ट्रेनें बिना झटके के और ज्यादा सुरक्षा के साथ पटरी बदल सकेंगी।

रेलवे सुरक्षा कमिश्नर (CRS) से स्पीड बढ़ाने की मंजूरी मिल चुकी है। 130 की रफ्तार होने के बाद ट्रेनें फाटक पर बार-बार नहीं रुकेंगी और हॉर्न बजाने की जरूरत भी कम हो जाएगी। इससे ट्रैक के किनारे रहने वाले लोगों को शोर से राहत मिलेगी और ट्रेनें बिना रुकावट अपनी मंजिल तक जल्दी पहुंच सकेंगी।

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