बिहार के भागलपुर जिले का एक युवक जो आठ साल पहले लापता हो गया था, वह अब सुरक्षित अपने घर लौट आया है। यह चमत्कार हैदराबाद में उसकी खास बिहारी भाषा की वजह से संभव हो पाया। रंजीत नाम का यह युवक मानसिक रूप से बीमार था और इलाज के दौरान कहीं चला गया था, जिसे एक ढाबा संचालक की सतर्कता ने उसके परिवार से फिर से मिला दिया।

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कैसे हुई रंजीत की पहचान?

11 फरवरी को हैदराबाद में ढाबा चलाने वाले वीरेंद्र सिंह ने रंजीत को अपने होटल के पास घूमते देखा। वीरेंद्र खुद सीवान के रहने वाले हैं, इसलिए उन्होंने रंजीत की बोलने की शैली से तुरंत पहचान लिया कि वह बिहार का रहने वाला है। उन्होंने रंजीत को खाना खिलाया और उससे बातचीत की। रंजीत ने बातचीत में बिहपुर थाने और उसके पास मौजूद एक दुर्गा मंदिर का जिक्र किया, जिससे उसकी पहचान की पहली कड़ी जुड़ी।

सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्कों ने की मदद

वीरेंद्र सिंह ने गूगल पर बिहपुर और उसके आसपास के गांवों को खोजा और नारायणपुर की सीडीपीओ पूजा कुमारी व अन्य स्थानीय लोगों से संपर्क किया। इसी दौरान पता चला कि रंजीत का चचेरा भाई संजीत भी हैदराबाद में ही ढाबे से करीब 120 किलोमीटर दूर काम कर रहा है। सूचना मिलते ही संजीत मौके पर पहुंचा और आधार कार्ड के जरिए रंजीत की शिनाख्त की गई। पहचान पूरी होने के बाद रंजीत को उसके भाई को सौंप दिया गया।

घटना की मुख्य जानकारी

विवरण जानकारी
नाम रंजीत
निवासी भ्रमरपुर, भागलपुर
लापता होने का समय 8 साल पहले
कहां मिला हैदराबाद, तेलंगाना
मदद करने वाले वीरेंद्र सिंह (सीवान निवासी)

रंजीत के पिता नागे मिस्त्री ने बताया कि उनका बेटा आठ साल पहले इलाज के दौरान लापता हो गया था। काफी तलाश के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला था। अब रंजीत की वापसी से उसकी पत्नी और दो बेटों सहित पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।


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