भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (JLNMCH) यानी मायागंज अस्पताल में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। इमरजेंसी वार्ड में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद उनका शव करीब 8 घंटे तक बेड पर ही पड़ा रहा। हद तो तब हो गई जब मौत के बाद भी शव को ऑक्सीजन लगाया हुआ छोड़ दिया गया। पास के बेड पर भर्ती अन्य मरीज रात भर शव के बगल में डर के साये में रहे और अस्पताल प्रशासन लापरवाह बना रहा।

अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर ने क्या जवाब दिया?

जब परिजनों ने शव को हटाने के लिए कहा तो वहां मौजूद स्टाफ ने बहुत ही रूखा जवाब दिया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने कहा कि हमारे पास कोई कमरा नहीं है, क्या करें शव को बाहर फिंकवा दें? अस्पताल अधीक्षक ने बाद में सफाई दी है कि मॉर्चरी में निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए दिक्कत हुई। वहीं, ऑक्सीजन लगे रहने को उन्होंने एक गलती माना है। डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने फोटो और वीडियो सामने आने के बाद मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

एंबुलेंस के लिए परिजनों को कितनी परेशानी हुई?

बुजुर्ग की मौत 31 जनवरी की रात करीब 8:30 बजे हुई थी, लेकिन शव को ले जाने के लिए सुबह 4:45 बजे एंबुलेंस मिल पाई। परिजनों ने बताया कि सरकारी एंबुलेंस सेवा 102 पर संपर्क नहीं हो पाया और कोई मदद नहीं मिली। प्राइवेट एंबुलेंस वाले बहुत ज्यादा पैसे मांग रहे थे। नियम के मुताबिक सरकारी एंबुलेंस फ्री होनी चाहिए, लेकिन सिस्टम की लाचारी ने परिवार को रात भर परेशान रखा। इस दौरान शव को वॉर्ड में ही रखा गया, जिससे वहां भर्ती महिला और पुरुष मरीजों को काफी परेशानी हुई।

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