बिहार सरकार ने देश की रक्षा में जान न्योछावर करने वाले सैनिकों के परिवारों के लिए एक अहम कदम उठाया है। अब राज्य के शहीद जवानों के आश्रितों को जीवनयापन के लिए सरकारी जमीन दी जाएगी। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि आश्रितों को खेती के लिए एक एकड़ जमीन देने का प्रावधान किया गया है। अगर परिवार चाहे तो खेती की जगह घर बनाने के लिए जमीन का विकल्प भी चुन सकता है।
किन परिवारों को मिलेगा इसका लाभ?
सरकार ने इस योजना के लिए कुछ साफ नियम बनाए हैं ताकि जरूरतमंद परिवारों को ही इसका फायदा मिले। यह लाभ उन शहीदों के परिवारों को मिलेगा जो बिहार के मूल निवासी थे। इसमें सेना के अलावा पैरामिलिट्री फोर्स और बिहार मिलिट्री पुलिस (BMP) के जवान भी शामिल हैं।
- शहीद जवान ने कम से कम 6 महीने लगातार नौकरी की हो।
- ड्यूटी के दौरान या युद्ध में वीरगति प्राप्त की हो।
- आश्रित परिवार के पास पहले से रहने के लिए अपनी निजी जमीन नहीं होनी चाहिए।
- सैनिक कल्याण बोर्ड से प्रमाण पत्र होना जरुरी है।
जमीन कहां मिलेगी और क्या है नियम?
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, जमीन का आवंटन शहीद के गृह जिले में ही किया जाएगा। यह जमीन ग्रामीण क्षेत्र (Rural Area) में होगी और संबंधित ब्लॉक के अंदर ही देने की कोशिश की जाएगी।
परिवारों के पास दो विकल्प होंगे: या तो वे खेती के लिए 1 एकड़ जमीन ले सकते हैं, या फिर घर बनाने के लिए 5 डिसमिल जमीन। बंदोबस्त के समय एक मामूली टोकन राशि (Salami) जमा करनी होगी। इसके अलावा, जमीन मिलने के शुरूआती 5 साल तक कोई सालाना लगान (Rent) नहीं वसूला जाएगा।






