बिहार सरकार ने राज्य में तकनीक और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में 29 जनवरी 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य की पहली ‘सेमीकंडक्टर नीति-2026’ और ‘ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति-2026’ को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का लक्ष्य है कि इन नीतियों के जरिए बिहार में लगभग 25,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। इसका सीधा फायदा भागलपुर जैसे शहरों को मिलेगा, जहाँ के युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलने वाले हैं।
एक और जरूरी खबर: भागलपुर के Sandis Compound में लगा 5 दिवसीय ट्रेड फेयर, जानिए कब तक चलेगा यह मेला।
कंपनियों को मिलेगी भारी छूट और सब्सिडी
सरकार ने बाहर की बड़ी कंपनियों को बिहार बुलाने के लिए खजाना खोल दिया है। नई नीति के मुताबिक, जो कंपनियां यहाँ कॉल सेंटर, वित्तीय सेवा या आईटी ऑफिस खोलेंगी, उन्हें सरकार कई तरह की मदद देगी। इसमें ऑफिस का किराया, बिजली और कर्मचारियों की सैलरी में सरकारी सहायता शामिल है। खास बात यह है कि अगर कंपनियां बिहार के स्थानीय लोगों को नौकरी देती हैं, तो उन्हें ज्यादा आर्थिक लाभ मिलेगा।
| सुविधा का नाम | सरकार की तरफ से मदद |
|---|---|
| GCC प्रोजेक्ट सब्सिडी | पूंजी निवेश का 30% (अधिकतम 50 करोड़ रुपये) |
| सेमीकंडक्टर यूनिट | केंद्र सरकार की सब्सिडी के ऊपर 60% एक्स्ट्रा मदद |
| रोजगार लक्ष्य | 2 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां |
| अन्य लाभ | बिजली, पानी, जमीन और लीज रेंटल पर सब्सिडी |
भागलपुर बनेगा पूर्वी भारत का नया हब
इस नीति का सबसे ज्यादा असर भागलपुर के औद्योगिक विकास पर देखने को मिल सकता है। पूर्वी बिहार उद्योग संघ (EBIA) के मुताबिक, सिल्क सिटी भागलपुर अपनी शैक्षणिक सुविधाओं और हुनरमंद युवाओं के कारण कॉल सेंटर और बैंकिंग सेवाओं के लिए एक बेहतरीन जगह है। सरकार ने ‘बिहार स्टेट मार्केटिंग अथॉरिटी’ बनाने का भी फैसला किया है। इससे भागलपुर के सिल्क और हथकरघा कारीगरों को अपने उत्पाद विदेश भेजने और उनकी ब्रांडिंग करने में आसानी होगी। राज्य सरकार का प्लान है कि यहाँ के तकनीकी संस्थानों को ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाए, ताकि भागलपुर के युवा अपने ही शहर में अच्छी सैलरी वाली नौकरी पा सकें।






