बिहार के लोगों के लिए, खासकर किसानों और आम नागरिकों के लिए मौसम से जुड़ी एक बड़ी खबर आई है। अब भागलपुर और पश्चिम चंपारण जिले में मौसम का हाल जानने के लिए अत्याधुनिक डॉप्लर वेदर रडार (Doppler Weather Radar) लगाए जा रहे हैं। पटना विधान परिषद में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों ने इसकी जानकारी दी है। इस नई तकनीक के आने से बाढ़, आंधी और बारिश का पता काफी पहले चल जाएगा, जिससे जान-माल का नुकसान कम होगा।
भागलपुर और चंपारण को क्या मिलेगा फायदा?
इस रडार के लगने से सबसे बड़ा फायदा स्थानीय लोगों को होगा। अब भागलपुर में लगा रडार वहां के साथ-साथ मुंगेर, कोसी और पूर्णिया प्रमंडल के जिलों का भी मौसम बता सकेगा। पहले इन जिलों को मौसम के अलर्ट के लिए पटना के भरोसे रहना पड़ता था। अब भागलपुर से ही एसएमएस (SMS) के जरिए मौसम का बुलेटिन जारी किया जाएगा। इससे किसानों को खेती और आम लोगों को अपनी यात्रा प्लान करने में बहुत मदद मिलेगी।
इसरो और बिहार सरकार कैसे कर रहे काम?
स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC-ISRO) और बिहार मौसम सेवा केंद्र (BMSK) मिलकर पिछले तीन सालों से इस पर काम कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रडार सिस्टम न केवल मौसम बताएगा, बल्कि आपदा प्रबंधन में भी मदद करेगा।
- बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं की पूर्व सूचना मिलेगी।
- वज्रपात (Lightning) और लू (Heatwave) का अलर्ट समय से मिलेगा।
- छठ पूजा जैसे बड़े त्योहारों पर भीड़ को संभालने में भी सैटेलाइट तकनीक मदद करेगी।
कब तक शुरू होगा यह सिस्टम?
बिहार सरकार ने अपने 2025-26 के बजट में इन रडार को लगाने की मंजूरी दी है। इस साल जनवरी में ही आपदा प्रबंधन विभाग और इसरो के बीच इसको लेकर एक समझौता भी हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, यह हाइब्रिड रडार सिस्टम मानसून के दबाव, भारी बारिश और ओलावृष्टि को पकड़ने में बहुत सक्षम है। सरकार का मकसद है कि तकनीक का इस्तेमाल करके बिहार के हर नागरिक को सुरक्षित रखा जाए।






