मुंगेर से भागलपुर के सबौर तक बनने वाले 107.70 किलोमीटर लंबे फोरलेन मरीन ड्राइव का काम अब रफ्तार पकड़ रहा है। बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) की टीम शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 को 8292.65 करोड़ रुपये की इस बड़ी योजना के लिए अलाइनमेंट का सर्वे करेगी। इस सर्वे का सबसे बड़ा मकसद घनी आबादी को बचाना और जमीन अधिग्रहण को कम करना है ताकि आम लोगों को विस्थापन की समस्या से न जूझना पड़े।
मरीन ड्राइव परियोजना से जुड़ी मुख्य जानकारी
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सर्वे के दौरान एरियल सर्वे की भी मदद ली जाएगी ताकि रास्ते का सही चुनाव हो सके। इस परियोजना से जुड़े कुछ मुख्य आंकड़े नीचे दिए गए हैं:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल लंबाई | 107.70 किलोमीटर |
| अनुमानित लागत | 8292.65 करोड़ रुपये |
| नोडल एजेंसी | BSRDCL |
| शुरुआत और अंत | मुंगेर से भागलपुर (सबौर) |
अलाइनमेंट में क्यों किया जा रहा है बदलाव?
शुरुआती सर्वे में प्रस्तावित मार्ग पर करीब 250 से अधिक मकानों की पहचान की गई थी जो सड़क के दायरे में आ रहे थे। स्थानीय लोगों और सुल्तानगंज के विधायक प्रो. ललित नारायण मंडल ने इस पर चिंता जताई थी। विधायक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर रिहायशी इलाकों को बचाने का आग्रह किया था।
- मकानों की सुरक्षा: बिहार सरकार ने आश्वासन दिया है कि निर्माण के दौरान किसी भी बने हुए घर को ध्वस्त नहीं किया जाएगा।
- नया रूट प्लान: सड़क के अलाइनमेंट को 40 मीटर उत्तर की ओर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
- भूमि अधिग्रहण: BSRDCL अब संशोधित प्रस्ताव तैयार कर रहा है ताकि कम से कम निजी जमीन की जरूरत पड़े।
- पर्यटन और व्यापार: इस मरीन ड्राइव के बनने से गंगा किनारे का सुंदर नजारा मिलेगा और उत्तर बिहार से संपर्क बेहतर होगा।
इस फोरलेन मरीन ड्राइव के बनने से भागलपुर और मुंगेर शहरों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और यात्रा के समय में भी बड़ी बचत होगी। वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद और संशोधित अलाइनमेंट फाइनल होते ही निर्माण कार्य में और तेजी आने की उम्मीद है।






