भागलपुर के सुल्तानगंज में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। नागरिक उड्डयन विभाग ने प्रोजेक्ट की डीपीआर (DPR) तैयार करने वाली एजेंसी के चयन के लिए टेंडर जमा करने की समय सीमा बढ़ा दी है। इसके साथ ही, स्थानीय किसानों के भारी विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब विवादित जगह के बजाय एयरपोर्ट के लिए जमीन थोड़ी दूरी पर ली जाएगी ताकि काम में कोई रुकावट न आए।
टेंडर जमा करने की नई तारीख और पूरा शेड्यूल
बिहार सरकार के नागरिक उड्डयन विभाग ने पहले टेंडर जमा करने की अंतिम तारीख 27 फरवरी तय की थी, जिसे अब बढ़ाकर 12 मार्च 2026 कर दिया गया है। विभाग द्वारा जारी नए शेड्यूल के मुताबिक, अब टेक्निकल बिड 13 मार्च को खोली जाएगी और 17 मार्च को प्रेजेंटेशन होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 4000 मीटर लंबा रनवे बनाया जाना है, जिस पर बड़े कमर्शियल विमान भी आसानी से लैंड कर सकेंगे।
किसानों के विरोध के कारण बदली लोकेशन
एयरपोर्ट के लिए पहले जो जमीन चिन्हित की गई थी, वहां के किसान मुआवजे और उपजाऊ जमीन जाने के डर से लगातार विरोध कर रहे थे। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने डिप्टी सीएम Samrat Choudhary का हेलीकॉप्टर विरोध के कारण वहां लैंड नहीं कर पाया था। इसी को देखते हुए प्रशासन ने अब ‘बीच का रास्ता’ निकाला है और मूल प्लान से हटकर पास की दूसरी जगह पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है।
जमीन का मुआवजा और बजट का हिसाब
इस एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए कुल 855 से 931 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है। इसके लिए नीतीश कुमार की कैबिनेट ने जमीन अधिग्रहण के लिए 472.72 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। प्रशासन ने किसानों के लिए करीब 50 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा प्रस्तावित किया है। यह एयरपोर्ट भागलपुर के सिल्क कारोबार और अजगैबीनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।






