सारण जिले के सोनपुर स्थित कालूघाट इंटरमोडल टर्मिनल (IMT) से मार्च 2026 में जल परिवहन सेवा पूरी तरह शुरू हो जाएगी। बिहार सरकार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने हाल ही में वहां का निरीक्षण किया और अधिकारियों को बची हुई तैयारियों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है। गंगा नदी के किनारे 13.17 एकड़ में बना यह टर्मिनल बिहार के रास्ते नेपाल और हल्दिया (पश्चिम बंगाल) के बीच माल ढुलाई को आसान बनाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 82.48 करोड़ रुपये की लागत आई है।
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कितना सस्ता होगा जलमार्ग से सामान भेजना?
पानी के रास्ते माल भेजना सड़क और ट्रेन के मुकाबले काफी किफायती साबित होगा। आंकड़ों के अनुसार, जलमार्ग से ढुलाई का खर्च सड़क परिवहन के मुकाबले एक तिहाई है। इसके अलावा, सरकार ‘जलवाहक योजना’ के तहत उन लोगों को परिचालन लागत पर 35% तक का रिफंड देगी जो सड़क या रेल छोड़कर जलमार्ग का इस्तेमाल करेंगे।
| माध्यम | खर्च (प्रति टन-किमी) |
|---|---|
| सड़क (Road) | 1.5 रुपये |
| रेल (Rail) | 1.0 रुपये |
| जलमार्ग (Waterway) | 0.5 रुपये |
कालूघाट टर्मिनल की क्षमता और खास बातें
कालूघाट टर्मिनल को आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है। यहां सालाना 77,000 कंटेनर (TEUs) संभालने की क्षमता है। माल रखने के लिए यहां 2,895 वर्ग मीटर का एक बड़ा स्टोरेज यार्ड बनाया गया है। यह टर्मिनल पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलेगा, जिसे एक निजी कंपनी (SAPL) ऑपरेट करेगी। इससे न सिर्फ नेपाल जाने वाले सामान की ढुलाई तेज होगी, बल्कि उत्तर बिहार के व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।
यात्रियों और व्यापारियों के लिए नई सुविधाएं
इस टर्मिनल के शुरू होने के साथ ही आसपास के इलाकों में कनेक्टिविटी को भी बेहतर किया जा रहा है।
- मार्च 2026 से टर्मिनल और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच 150-175 नई इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसें चलाई जाएंगी।
- कालूघाट को ‘बिहार-नेपाल-हल्दिया’ ट्रेड कॉरिडोर का मुख्य केंद्र बनाया गया है।
- पटना के पहलवान घाट पर भी एक नया क्रूज टर्मिनल बनाने के लिए जमीन देखी जा रही है।
- जल परिवहन से प्रदूषण भी बहुत कम होता है, जो पर्यावरण के लिए काफी अच्छा है।






