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इस लेख में बिहार के विश्वविद्यालयों में सख्त शैक्षणिक निगरानी के बारे में जानकारी दी गई है। राज्य के गवर्नर ने शिक्षण गतिविधियों को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है।




पटना में, बिहार के विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों को अब अधिक सख्त शैक्षणिक निगरानी के तहत रखा गया है। राज्य के गवर्नर और चांसलर, अरिफ मोहम्मद खान ने यह आदेश दिया है कि उपकुलपति अपने विश्वविद्यालयों में दैनिक शिक्षण विवरण अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करें।



सोमवार को जारी निर्देश के अनुसार, विश्वविद्यालयों को हर दिन यह जानकारी अपलोड करनी होगी कि कितनी कक्षाएं आयोजित की गईं, कौन से विषय पढ़ाए गए, और कौन सा शिक्षक कक्षा संभाल रहा है। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि किसी भी दिन पाठ्यक्रम कितना कवर हुआ है।



इस आदेश के बाद विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक जिम्मेदारी बढ़ गई है। अगर समय पर सही जानकारी अपलोड नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।



इसके अलावा, उपकुलपतियों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि शैक्षणिक कार्यक्रम, फैकल्टी के अनुसार कक्षा का समय सारणी और वार्षिक परीक्षा का कैलेंडर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रमुखता से प्रदर्शित हो और नियमित रूप से अपडेट किया जाए।



शिक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह कदम छात्रों के लिए फायदेमंद होगा। इससे कक्षाएं नियमित रूप से आयोजित होंगी और पाठ्यक्रम को करीब से ट्रैक किया जा सकेगा। इस तरह से शैक्षणिक मानकों को बढ़ाने और कक्षाओं के अनियमित होने की पुरानी शिकायतों को कम करने की कोशिश की जा रही है।





Summary:

  • बिहार के विश्वविद्यालयों को सख्त शैक्षणिक निगरानी का सामना करना पड़ेगा।

  • हर दिन शिक्षण गतिविधियों का विवरण वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

  • सही जानकारी न देने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

  • शैक्षणिक कार्यक्रम और परीक्षा कैलेंडर भी वेबसाइट पर अपडेट रहेंगे।

  • इससे छात्रों को नियमित कक्षाएं और पाठ्यक्रम की सही जानकारी मिलेगी।



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