भागलपुर और मुंगेर क्षेत्र में विकास की एक नई तस्वीर तैयार हो रही है। अब यहाँ के उद्योगों और घरों तक नेचुरल गैस (PNG) पहुँचाने की कवायद तेज कर दी गई है। इसका सबसे पहला और बड़ा बदलाव बरारी स्थित सुधा डेयरी (Sudha Dairy) के प्लांट में देखने को मिलेगा। अब यह प्लांट अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयले पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरी तरह से नेचुरल गैस पर शिफ्ट किया जा रहा है। Indian Oil को केंद्र सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी है।
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कब और कैसे बिछाई जा रही है गैस पाइपलाइन?
इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। योजना को चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में मुंगेर से सुल्तानगंज तक 31 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जानी है। इसमें से बरियारपुर तक 10 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है।
सुल्तानगंज से भागलपुर तक के दूसरे चरण का काम अगले महीने शुरू होने वाला है। गैस की सप्लाई मोकामा से आ रही 72 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से की जाएगी, जो गेल (GAIL) की मुख्य ट्रांसमिशन लाइन से जुड़ी है। साहिबगंज के भूतनाथ और गोराडीह में स्टेशनों के लिए जमीन का अधिग्रहण भी कर लिया गया है।
डेयरी और आम जनता को इससे क्या होगा फायदा?
सुधा डेयरी को रोजाना करीब 800 से 1,000 किलो नेचुरल गैस की जरूरत होगी। कोयले से गैस पर शिफ्ट होने से प्लांट की उत्पादन लागत कम हो जाएगी। जानकारों का मानना है कि लागत कम होने से भविष्य में दूध की कीमतों में भी कुछ राहत मिल सकती है।
इसके अलावा, गोराडीह इंडस्ट्रियल जोन और बियाडा (BIADA) क्षेत्र की डाई इंडस्ट्रीज को भी गैस कनेक्शन देने की योजना है। आम लोगों के घरों तक पाइपलाइन से गैस (PNG) पहुँचाने का पूरा लक्ष्य दिसंबर 2026 तक रखा गया है, लेकिन कुछ इलाकों में इसी साल कनेक्शन मिलने की उम्मीद है। अभी शहर के 33 वार्डों में सर्वे का काम चल रहा है।






