भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड स्थित रानी बमिया गांव के रहने वाले मरीन इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार, 1 अप्रैल को पटना एयरपोर्ट पहुंचा। ईरान-इजराइल युद्ध के दौरान एक तेल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले में उनकी मौत हो गई थी। करीब 20 दिनों के लंबे इंतजार के बाद उनका शव बिहार लाया गया है, जिसे अब एंबुलेंस के जरिए उनके पैतृक गांव ले जाया जा रहा है।

कैसे और कब हुआ था यह बड़ा हादसा?

50 वर्षीय देवनंदन प्रसाद सिंह इंटरनेशनल ब्रावो शिपिंग कंपनी में एडिशनल चीफ इंजीनियर के पद पर तैनात थे। वह ‘Safesea Vishnu’ नामक तेल टैंकर पर ड्यूटी कर रहे थे। 11 मार्च 2026 को जब जहाज इराक के बसरा से सिंगापुर की ओर जा रहा था, तभी उस पर ड्रोन या मिसाइल से हमला हुआ। इस हमले में देवनंदन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। जहाज पर सवार अन्य 27 क्रू मेंबर्स को इराकी कोस्ट गार्ड ने सुरक्षित बचा लिया था।

परिजनों के आरोप और अंतिम संस्कार की तैयारी

देवनंदन सिंह का परिवार 2019 से मुंबई के कांदिवली ईस्ट में रह रहा था। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है। उनके भाई और मां ने सरकार पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि सरकार की सुस्ती की वजह से उनकी जान गई। दिवंगत इंजीनियर का अंतिम संस्कार 2 अप्रैल 2026 की सुबह भागलपुर जिले के कहलगांव में किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर है।


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