भागलपुर के शाहजंगी स्थित प्राथमिक विद्यालय गंगोता मैदान में मिड डे मील खाने के बाद करीब 15 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई. 1 अप्रैल, 2026 को हुई इस घटना में चौथी और पांचवीं कक्षा के छात्रों ने छोले-चावल खाने के बाद पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की. बच्चों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए सदर अस्पताल भागलपुर पहुंचाया गया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. इस पूरे घटनाक्रम के दौरान स्कूल के शिक्षकों और प्रधानाचार्य की अस्पताल से अनुपस्थिति ने अभिभावकों के गुस्से को और बढ़ा दिया है.
घटना के मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति
स्कूल में दोपहर का भोजन करने के बाद बच्चों ने बताया कि छोले का स्वाद काफी खट्टा था और उसमें से अजीब बदबू आ रही थी. खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों की हालत खराब होने लगी. अस्पताल में भर्ती कराए गए बच्चों की स्थिति के बारे में जानकारी नीचे दी गई है:
- प्रभावित छात्र: लगभग 15 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
- भोजन का स्रोत: यह भोजन एक NGO द्वारा वितरित किया गया था जिसने उसी दिन से 157 स्कूलों में खाना देना शुरू किया था.
- स्वास्थ्य अपडेट: प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश बच्चों की हालत स्थिर है और कई को घर भेज दिया गया है.
- स्टाफ की लापरवाही: बच्चों के अस्पताल पहुंचने के समय स्कूल का कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी वहां मौजूद नहीं था.
प्रशासन की कार्रवाई और जिलाधिकारी का बयान
मामले की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी स्वयं बच्चों का हाल जानने सदर अस्पताल पहुंचे. उन्होंने इसे प्रथम दृष्टया गंभीर फूड पॉइजनिंग का मामला नहीं माना क्योंकि बच्चों में बहुत ज्यादा गंभीर लक्षण नहीं थे, फिर भी जांच के निर्देश दिए गए हैं. इस मामले की गहन जांच के लिए एक टीम बनाई गई है जो खाने की क्वालिटी और बच्चों की तबीयत बिगड़ने के असली कारणों का पता लगाएगी.
| पद | अधिकारी का नाम | कार्रवाई/आदेश |
|---|---|---|
| जिलाधिकारी (DM) | डॉ. नवल किशोर चौधरी | जांच टीम का गठन और अस्पताल का दौरा |
| जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) | राजकुमार शर्मा | दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन |
| जांच टीम के सदस्य | DEO, DPO MDM, SDO सदर | पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करेंगे |
जिला शिक्षा पदाधिकारी राजकुमार शर्मा ने कहा है कि स्कूल स्टाफ की अनुपस्थिति और भोजन की गुणवत्ता को लेकर जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस घटना ने स्कूलों में दिए जाने वाले मिड डे मील की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.






