बिहार का मखाना अब पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान बिहार का मखाना एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के रूप में सामने आया है. इससे न केवल राज्य की शान बढ़ी है बल्कि किसानों की आमदनी में भी बड़ा सुधार देखा गया है. केंद्र और राज्य सरकार की ओर से चलायी जा रही योजनाओं के कारण मखाना की खेती अब नए ऊंचाइयों को छू रही है. प्रधानमंत्री ने भी 15 सितंबर 2025 को पूर्णिया में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन की शुरुआत की थी.
विदेशों में बढ़ा बिहार के मखाना का निर्यात
बिहार से मखाना का निर्यात बहुत तेजी से बढ़ा है. 21 जनवरी 2026 को पहली बार पूर्णिया जिले से 2 मीट्रिक टन मखाना समुद्री रास्ते से दुबई भेजा गया. इसके बाद फरवरी 2026 में बिहटा ड्राई पोर्ट से 5 टन मखाना चीन के लिए रवाना किया गया. पिछले छह महीनों के आंकड़ों के अनुसार बिहार ने कुल 120 टन मखाना अलग-अलग देशों को भेजा है. मखाना की बढ़ती मांग को देखते हुए इस साल करीब 30,000 टन निर्यात होने की उम्मीद है. जापान जैसे देशों की कंपनियों के साथ भी मखाना सप्लाई के लिए समझौते किए गए हैं.
| मुख्य जानकारी | आंकड़े और विवरण |
|---|---|
| निर्यात का लक्ष्य | 30,000 टन सालाना |
| प्रमुख बाजार | दुबई, चीन, जापान |
| सरकारी अनुदान | 75% तक की सब्सिडी |
| खेती का क्षेत्र | 10 से बढ़ाकर 16 जिले |
| कृषि उत्पाद निर्यात | 2237.52 करोड़ रुपये (मखाना प्रमुख) |
किसानों के लिए सरकारी योजना और नई मशीन
बिहार सरकार ने मखाना विकास योजना के तहत खेती का दायरा बढ़ा दिया है. अब 16 जिलों के किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं जिसमें उन्हें 75% तक अनुदान दिया जा रहा है. किसानों की लागत कम करने के लिए दरभंगा में एक नया मखाना बीज निकासी यंत्र भी प्रदर्शित किया गया है. यह मशीन बीज निकालने के खर्च को 100 रुपये से घटाकर सिर्फ 20 रुपये प्रति किलोग्राम कर देगी. केंद्र सरकार ने भी 2030-31 तक के लिए 476.03 करोड़ रुपये के बजट के साथ केंद्रीय मखाना विकास योजना को मंजूरी दी है ताकि प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग को और बेहतर बनाया जा सके.
- मिथिला मखाना को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए HS Code भी मिल गया है.
- मखाना की खेती अब 40,000 हेक्टेयर के करीब पहुँच गई है.
- किसानों को ट्रेनिंग और आधुनिक उपकरण भी दिए जा रहे हैं.
- राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा इस कार्य में मदद कर रहा है.






