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बिहार की जेलों में हाल ही में हुए छापों ने एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें अधिकारियों की मिलीभगत और अवैध सुविधाओं का जिक्र है।
पटना में हाल ही में हुई छापेमारी ने बिहार की जेल प्रबंधन को हिला कर रख दिया है। यह छापेमारी 2 दिसंबर को गोपालगंज के चनावे जेल में हुई, जहां मोबाइल फोन और पैसे बरामद हुए।
राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर एक व्यापक समीक्षा शुरू की है। राज्यभर में 29 नवंबर को की गई अचानक जांच ने यह दिखाया कि कई जेलों में एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जहां अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के आरोप हैं।
इस मामले में अब 24 से अधिक कर्मचारियों के खिलाफ जांच चल रही है। अधिकारियों का मानना है कि ये अवैध गतिविधियाँ कई जेलों में फैली हुई हैं, जिसमें जेल के कर्मचारी मुख्य भूमिका में हैं।
जेल सेवा में लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार के प्रमाण मिले हैं। हाल ही में कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जैसे कि बेतिया के सहायक जेल अधीक्षक, जिन पर अवैध सामान ले जाने का आरोप है।
जांच एजेंसी की सतर्कता टीम पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और वे राज्य की सतर्कता विभाग के साथ मिलकर जांच कर रहे हैं। आने वाले दिनों में और भी कड़े कदम उठाए जाने की संभावना है।
Summary:
- बिहार की जेलों में छापों से अवैध गतिविधियों का खुलासा हुआ है।
- सरकार ने सभी जेलों की जांच शुरू की है।
- 24 से अधिक जेल कर्मचारियों के खिलाफ जांच चल रही है।
- भ्रष्टाचार के मामले में कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
- आगामी दिनों में और कड़े कदम उठाए जाएंगे।






