भागलपुर से हावड़ा के बीच 105 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर कवच प्रणाली लगा दी गई है. इस नई तकनीक से अब ट्रेनों का संचालन और भी सुरक्षित हो गया है. यह प्रणाली ड्राइवर को तय गति सीमा में ट्रेन चलाने में मदद करेगी और अगर ड्राइवर इसमें विफल रहा तो ट्रेन अपने आप रुक जाएगी.

भागलपुर से हावड़ा के यात्री अब सुरक्षित

हर महीने लगभग 50 हजार यात्री भागलपुर से हावड़ा के बीच सफर करते हैं. इन यात्रियों के लिए अब ट्रेन यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित हो गई है. भागलपुर से हावड़ा के लिए पांच ट्रेनें चलती हैं, जिनमें एक वंदे भारत एक्सप्रेस भी शामिल है. पूर्व रेलवे का यह रूट भागलपुर से हावड़ा के बीच का है और इसका फायदा बिहार से हावड़ा तक जाने वाली ट्रेनों को मिलेगा. हावड़ा से वर्धमान के बीच भी कवच प्रणाली का आधुनिक मॉडल 4.0 लगाया गया है.

धोनी-टेकाणी रेलखंड पर परिचालन तेज हुआ

धोनी और टेकाणी स्टेशन के बीच संझा घाट हाल्ट पर गुरुवार को आईबीएच (इंटरमीडिएट ब्लॉक हट) की व्यवस्था भी कर दी गई. यह नई सिग्नलिंग व्यवस्था रेलखंड को छोटे हिस्सों में बांटेगी, जिससे एक ही लाइन पर दो ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन संभव होगा. आईबीएच के चालू होने से ट्रेनों की गति, लाइन क्षमता और समय प्रबंधन में सुधार होगा. स्टेशन अधीक्षक विनय प्रकाश ने बताया कि कमीशनिंग के बाद इसे शुरू कर दिया गया.

कवच प्रणाली क्या है

कवच एक जटिल प्रणाली है जिसमें लोको कवच, स्टेशन कवच, दूरसंचार टावर, ट्रैक की पूरी लंबाई में आरएफ-आईडी टैग जैसे घटक होते हैं. यह प्रणाली देश में ही डिजाइन, विकसित और तैयार की गई है. बालासोर के पास कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे के बाद पूर्व रेलवे ने सुरक्षा पर काम बढ़ा दिया. जिन रूटों पर सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां की समीक्षा की जा रही. कवच की सुरक्षा यूपी से राजस्थान के मथुरा-नागदा (549 मार्ग किमी) के बाद सबसे ज्यादा 105 किमी पूर्व रेलवे के इस हिस्से में है.

कौन-कौन सी ट्रेनें कवच से लाभान्वित होंगी

भागलपुर से हावड़ा के बीच जयनागर-हावड़ा एक्सप्रेस, जो कहलगांव, साहिबगंज, वर्धमान होकर जाती है, और कविगुरु व वंदे भारत एक्सप्रेस भी इस प्रणाली से लाभान्वित होंगी. 24 नवंबर तक कविगुरु एक्सप्रेस से 3933, वंदे भारत से 10357, जयनागर-हावड़ा एक्सप्रेस से करीब 7600 और जमालपुर-हावड़ा एक्सप्रेस से 28138 यात्रियों ने आरक्षण कराकर सफर किया.


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