बिहार में शराबबंदी के बावजूद तस्कर डाल-डाल और पुलिस पात-पात वाली कहावत को सच कर रहे हैं। भागलपुर और इसके आसपास के इलाकों में अब लग्जरी गाड़ियों की जगह भारी-भरकम सीमेंट मिक्सर मशीनों का इस्तेमाल शराब ढोने के लिए हो रहा है। तस्करों का यह नया तरीका पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। पिछले आठ महीनों में पुलिस ने भागलपुर रेंज में ऐसी 6 मिक्सर मशीनें जब्त की हैं, जिनमें सीमेंट की जगह भारी मात्रा में शराब की पेटियां भरी हुई थीं।
सीमेंट मिक्सर में कैसे हो रही है तस्करी?
तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों का सहारा लिया है। उन्हें लगता है कि पुलिस आमतौर पर सड़क बनाने वाली मशीनों की तलाशी नहीं लेती, इसी का फायदा उठाकर मिक्सर के अंदर गुप्त चैंबर बनाए जा रहे हैं। हाल ही में मिर्जाचौकी चेकपोस्ट पर पकड़ी गई एक मशीन निजी निर्माण कंपनी APCO से जुड़ी पाई गई थी, जिसे यूपी के जौनपुर का ड्राइवर चला रहा था। इसके अलावा नवगछिया-कटिहार बॉर्डर पर भी एक मिक्सर मशीन से 395 पेटी शराब बरामद की गई थी।
महंगी मशीनों का जोखिम और कमाई का लालच
एक सीमेंट मिक्सर मशीन की कीमत मॉडल के हिसाब से 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक होती है। इतनी महंगी मशीन को तस्करी में झोंकना बताता है कि मुनाफा कितना बड़ा है। जांच में सामने आया है कि तस्कर ड्राइवरों और कर्मचारियों को रिस्क लेने के लिए मोटी रकम देते हैं। एक सफल ट्रिप के लिए ड्राइवर को 1 से 2 लाख रुपये तक का एक्स्ट्रा ‘बोनस’ या लीज फीस दी जाती है। बांका में झारखंड बॉर्डर से आ रही एक गाड़ी से करीब 1 करोड़ रुपये की 10,372 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई थी।
पुलिस ने NH-31 और बॉर्डर पर बढ़ाई सख्ती
लगातार मिल रहे इन मामलों के बाद पुलिस और मद्य निषेध विभाग ने अपनी जांच का तरीका बदल दिया है। अब बॉर्डर पर तैनात पुलिसकर्मी बड़ी मशीनों और टैंकरों की भी बारीकी से जांच कर रहे हैं। नवगछिया पुलिस ने 28 जनवरी को NH 31 पर एक लाइन होटल में छापेमारी कर 3,249 लीटर विदेशी शराब पकड़ी और दो तस्करों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब कंस्ट्रक्शन कंपनियों के कर्मचारियों और ट्रांसपोर्टरों के बीच के नेटवर्क को खंगाल रही है ताकि असली सौदागरों तक पहुंचा जा सके।






