जहानाबाद में आज नीट (NEET) की तैयारी करने वाली छात्रा को न्याय दिलाने के लिए ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ की शुरुआत हो गई है। ऐपवा (AIPWA) और आइसा (AISA) के बैनर तले मखदुमपुर से शुरू हुई यह यात्रा जिला मुख्यालय पहुंची, जहां अरवल मोड़ पर एक बड़ी सभा आयोजित की गई। इस दौरान भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और पटना के हॉस्टल में छात्रा के साथ हुई दरिंदगी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना है कि जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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क्या है पूरा मामला और पुलिस की रिपोर्ट?

पटना के एक निजी हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही 18 साल की छात्रा 6 जनवरी को बेहोश मिली थी और 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। शुरुआत में पुलिस ने मामले को हल्का बताया था, लेकिन एफएसएल (FSL) रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया।

रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर कुछ ऐसे निशान मिले हैं और पोस्टमार्टम में शरीर पर चोट पाई गई है, जिससे अमानवीय कृत्य की पुष्टि होती है। आंदोलनकारी इसी बात से नाराज हैं कि प्रशासन ने पहले मामले को दबाने की कोशिश क्यों की। संगठन ने आरोप लगाया है कि सरकार अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है।

11 फरवरी तक कैसे चलेगा यह आंदोलन?

आयोजकों ने साफ किया है कि यह लड़ाई लंबी चलने वाली है और वे पटना तक मार्च करेंगे। आंदोलन का पूरा प्लान इस तरह तय किया गया है:

  • आज की स्थिति: यात्रा जहानाबाद के मखदुमपुर से शुरू होकर अरवल मोड़ तक पहुंच चुकी है।
  • रूट: अब यह काफिला अरवल, औरंगाबाद, गया, नवादा और नालंदा जिलों से होकर गुजरेगा।
  • विधानसभा मार्च: 11 फरवरी 2026 को पटना में बिहार विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि मामले की सीबीआई (CBI) जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में होनी चाहिए। साथ ही उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो जिन्होंने जांच में लापरवाही बरती।


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