भागलपुर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर हुई लापरवाही अब खुलकर सामने आ गई है। नगर आयुक्त Kislay Kushwaha ने सोमवार को प्रोजेक्ट की समीक्षा की, जिसके बाद भारी गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। इशाकचक थाने में संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों के खिलाफ दो अलग-अलग केस दर्ज कराए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद काम में ढिलाई बरतने वाली निजी कंपनियों में डर का माहौल बन गया है।
करोड़ों के ई-टॉयलेट बने कबाड़
शहर में जनता की सुविधा के लिए करीब 2.06 करोड़ रुपये की लागत से 25 ई-टॉयलेट बनाए गए थे। जांच में पाया गया कि इनमें से लगभग सभी यूनिट खराब पड़ी हैं और कबाड़ हो चुकी हैं। मेंटेनेंस की कमी के कारण लोग इनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा शहर को सुंदर बनाने के लिए दीवारों पर की गई 3D पेंटिंग भी समय से पहले ही खराब होने लगी है। नगर आयुक्त ने आदेश दिया है कि खराब पेंटिंग को ठेकेदार अपने खर्च पर दोबारा ठीक करेंगे।
5 साल तक करनी थी देखरेख, अब होगी कार्रवाई
स्मार्ट सिटी के नियमों के मुताबिक, काम करने वाली एजेंसियों को निर्माण पूरा होने के बाद 5 साल तक उसका मेंटेनेंस करना अनिवार्य है। जांच में घंटाघर चौक पर लगी हाई-मास्ट लाइट और भेरवा तालाब के प्रोजेक्ट में भी लापरवाही मिली है। प्रशासन ने अब सभी ठेकेदारों से हर हफ्ते काम की रिपोर्ट मांगी है। नगर आयुक्त ने साफ कहा है कि अगर तय समय में सुधार नहीं हुआ तो कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।






