भागलपुर नगर निगम ने शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से पेयजल और सफाई शुल्क की वसूली तेज कर दी है। बिहार सरकार की पेयजल उपयोग शुल्क नीति 2021 के तहत अब पिछले तीन साल का बकाया भी वसूला जा रहा है। निगम ने अब तक करीब 2,000 नोटिस जारी किए हैं जिससे शहर के व्यापारियों में हलचल मच गई है। निगम का कहना है कि जो लोग समय पर भुगतान नहीं करेंगे उनके पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे और दोबारा कनेक्शन लेने के लिए ब्याज के साथ अतिरिक्त पैसा देना होगा।
पेयजल और सफाई के लिए तय किए गए नए रेट
नगर निगम ने अलग-अलग श्रेणी के भवनों और दुकानों के लिए मासिक शुल्क तय किया है। आवासीय घरों के लिए यह राशि होल्डिंग टैक्स के आधार पर तय की गई है जबकि व्यावसायिक इकाइयों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। स्टार होटल और अस्पतालों के लिए शुल्क की राशि काफी अधिक रखी गई है।
| श्रेणी | मासिक शुल्क (रुपये में) |
|---|---|
| आवासीय घर (कचरा कलेक्शन) | 30 |
| छोटी दुकानें | 100 |
| रेस्टोरेंट, बैंक और कोचिंग सेंटर | 500 |
| अस्पताल और नर्सिंग होम | 1,500 से 3,000 |
| स्टार होटल और मॉल | 5,000 |
| व्यावसायिक जल शुल्क (फ्लैट रेट) | 150 |
व्यवसायियों को मिले भारी भरकम नोटिस
निगम की इस कार्रवाई से व्यापारी वर्ग में काफी चिंता देखी जा रही है। हाल ही में एक व्यवसायी को तीन साल के कचरा शुल्क के तौर पर 1.81 लाख रुपये का नोटिस मिला है। इसके अलावा एक होटल संचालक को होल्डिंग टैक्स और पानी के बिल को मिलाकर लगभग 3.5 लाख रुपये चुकाने का नोटिस दिया गया है। फिलहाल निगम ने शहर के 12,000 प्रतिष्ठानों को चिन्हित किया है जिनमें से 2,000 को नोटिस भेजा जा चुका है।
सुविधाओं और मीटर पर उठे सवाल
ईस्टर्न बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स ने निगम की इस वसूली का विरोध किया है। व्यापारियों का तर्क है कि बिना मीटर लगाए और बिना सही सुविधा दिए तीन साल का बकाया वसूलना गलत है। चैंबर ऑफ कॉमर्स का कहना है कि कई दुकानों और घरों में नगर निगम का पानी कनेक्शन ही नहीं है फिर भी उनसे जल शुल्क मांगा जा रहा है। इधर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही होटलों और सर्विस स्टेशनों पर वाटर मीटर लगाए जाएंगे ताकि पानी की वास्तविक खपत का पता चल सके।






