मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 17 एजेंडों पर मुहर लगी है। इसमें सबसे अहम फैसला बिहार के प्रवासी मजदूरों को लेकर लिया गया है। सरकार ने दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूरों की मौत पर मिलने वाले मुआवजे को दोगुना कर दिया है। अब पीड़ित परिवार को दो लाख की जगह चार लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। साथ ही शव को घर तक लाने का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी।
प्रवासी मजदूरों को और क्या सुविधाएं मिलेंगी?
बिहार सरकार ने फैसला किया है कि अगर किसी मजदूर की मौत दूसरे राज्य या देश में काम करते वक्त होती है, तो उसका शव पैतृक गांव लाने में होने वाला पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। इससे गरीब परिवारों पर अचानक आने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। इसके अलावा, घायल मजदूरों का मुफ्त इलाज पहले की तरह जारी रहेगा। यह नियम उन मजदूरों पर लागू होगा जो बिहार से बाहर रोजगार के लिए गए हैं।
बिजली और सुपौल रिसर्च सेंटर पर क्या फैसला हुआ?
कैबिनेट ने मुफ्त बिजली योजना के लिए 349 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके तहत उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का प्रावधान है। वहीं, सुपौल के वीरपुर में बन रहे फिजिकल मॉडलिंग सेंटर (Physical Modeling Center) को पूरा करने के लिए 32 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। वर्ल्ड बैंक से फंड रुकने के बाद अब राज्य सरकार अपने पैसे से इसे पूरा करेगी। यह पुणे के बाद देश का दूसरा बड़ा जल विज्ञान संस्थान होगा जो कोसी नदी पर रिसर्च करेगा।
नगर निकाय और अदालतों के लिए नए नियम
- नगर निकायों में अब सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव मेयर या चेयरमैन की जगह सीधे पार्षद करेंगे। यह चुनाव गुप्त मतदान (Secret Ballot) से होगा।
- पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत लंबित करीब 6000 मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए कोर्ट में नए पद बनाए गए हैं।
- 15 साल पुराने सरकारी और निजी वाहनों के रजिस्ट्रेशन नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई है।






