बिहार सरकार राजधानी पटना समेत पूरे प्रदेश में रहने वाले किरायेदारों और मकान मालिकों को बड़ी राहत देने की योजना बना रही है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने रेंट एग्रीमेंट और लीज डीड की रजिस्ट्रेशन फीस को घटाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। सरकार का मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा लोग कानूनी रूप से मान्य एग्रीमेंट बनवाएं ताकि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सके।
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फीस में कितनी कटौती होगी और कितना पैसा बचेगा?
अभी तक रेंट एग्रीमेंट बनवाने के लिए कुल किराया राशि का 2 प्रतिशत निबंधन शुल्क देना होता है। नए प्रस्ताव के तहत इसे घटाकर 1 प्रतिशत करने की तैयारी है। इसके अलावा 0.5 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी पहले की तरह ही लगती रहेगी। इस फैसले से आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला बोझ काफी कम हो जाएगा।
| शुल्क का प्रकार | वर्तमान दर | प्रस्तावित दर |
|---|---|---|
| रजिस्ट्रेशन फीस | 2% | 1% |
| स्टाम्प ड्यूटी | 0.5% | 0.5% |
| कुल खर्च | 2.5% | 1.5% |
उदाहरण के लिए, अगर आपके एग्रीमेंट की कुल वैल्यू 10 लाख रुपये है, तो पहले आपको करीब 25 हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे। नए नियम के लागू होने के बाद यह खर्च घटकर लगभग 15 हजार रुपये रह जाएगा। यानी सीधे तौर पर 10 हजार रुपये की बचत होगी।
कोर्ट में मान्य नहीं होता नोटरी वाला कागज
अक्सर देखा जाता है कि लोग पैसे बचाने के चक्कर में 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी से साइन करवाकर एग्रीमेंट मान लेते हैं। विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नोटरी वाला एग्रीमेंट कोर्ट में सबूत के तौर पर मान्य नहीं होता है। रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत निबंधन कार्यालय में रजिस्टर्ड दस्तावेज ही कानूनी रूप से सही माने जाते हैं।
पटना में करीब 10 लाख किरायेदार रहते हैं, लेकिन साल भर में मुश्किल से 5 हजार एग्रीमेंट ही रजिस्टर्ड होते हैं। फीस कम होने से उम्मीद है कि लोग सही तरीका अपनाएंगे और मकान मालिक व किरायेदार दोनों सुरक्षित रहेंगे। इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी भी बनाई गई है जो जल्द ही इसे अंतिम रूप देगी।






