वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को बजट पेश करते हुए देश में यातायात सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं. सरकार ने रेलवे के लिए 2.75 लाख करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट रखा है. इसमें सबसे खास बात 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 5 जलमार्ग परियोजनाओं की घोषणा है, जिससे आने वाले समय में आम लोगों का सफर और सामान ढुलाई दोनों आसान हो जाएंगे. सरकार का पूरा जोर लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने पर है.

कहाँ-कहाँ चलेंगी 7 नई हाई-स्पीड ट्रेनें?

सरकार ने जिन 7 नए रूट की पहचान की है, उनमें उत्तर भारत और दक्षिण भारत के कई शहर शामिल हैं. दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलिगुड़ी तक का रूट बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए काफी अहम होगा. इसके अलावा मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु और हैदराबाद-बेंगलुरु रूट पर भी काम शुरू करने की योजना है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का काम पहले से चल रहा है और इसका सूरत-बिलिमोरा सेक्शन 2026 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है.

पटना और जलमार्ग प्रोजेक्ट में क्या मिलेगा?

शिपिंग और जलमार्ग सेक्टर के लिए 70,000 करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया है. इसमें पटना का गाय घाट एक प्रमुख केंद्र बनेगा, जिसे हल्दिया और चटगांव पोर्ट से जोड़ा जाएगा. इसका मतलब है कि बिहार से सामान सीधे पानी के रास्ते बाहर भेजा जा सकेगा. ओडिशा में भी नेशनल वाटरवे-5 पर काम होगा ताकि कोयले की ढुलाई आसानी से हो सके. सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक जलमार्गों से माल ढुलाई को बढ़ाया जाए.

परियोजनाओं की लागत और तैयारी

  • रेलवे बजट: रेलवे के लिए कुल 2.75 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
  • हाई-स्पीड रेल लागत: नेटवर्क विस्तार के लिए लगभग 15 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता का अनुमान है.
  • नई तकनीक: नए कॉरिडोर के लिए स्वदेशी हाई-स्पीड तकनीक का इस्तेमाल होगा जो 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार देगी.
  • निजी भागीदारी: फंडिंग की कमी को पूरा करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल लाया गया है.

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