भागलपुर के तिलकामांझी स्थित ATMA परिसर में मंगलवार को पांच दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण की शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी प्रेम शंकर प्रसाद और जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. अंजलि कुमारी सिन्हा ने किया। 7 फरवरी तक चलने वाले इस ट्रेनिंग में किसानों को खेती के साथ बकरी पालन करके आमदनी बढ़ाने के तरीके सिखाए जा रहे हैं।
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क्या है सरकारी योजना और ट्रेनिंग का मकसद?
अधिकारियों ने बताया कि पारंपरिक खेती में अब मुनाफा कम और प्रतिस्पर्धा ज्यादा है, इसलिए बकरी पालन एक अच्छा विकल्प है। प्रशिक्षण में आए Utthan Patna के निदेशक संतोष कुमार ने बताया कि विभाग तीन तरह की यूनिट के लिए मदद देता है। इसमें मुख्य रूप से ये यूनिट शामिल हैं:
- 20 बकरी और 1 बकरा
- 40 बकरी और 2 बकरा
- 100 बकरी और 5 बकरा
सब्सिडी पाने के लिए मानने होंगे ये नियम
जिला पशुपालन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी लाभ ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर मिलेगा। इसके लिए जल्द ही विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन शुरू होंगे। सबसे जरुरी नियम यह है कि एग्रीमेंट होने के 60 दिनों के अंदर किसान को बकरी शेड और घेराबंदी का काम पूरा करना होगा। जो किसान यह 5 दिनों की ट्रेनिंग पूरी करेंगे, उन्हें योजना का लाभ देने में प्राथमिकता दी जाएगी।
व्यापारियों को सीधे बेचने से होगा फायदा
ट्रेनिंग के दौरान बताया गया कि बकरी पालन में बिचौलियों का रोल कम होता है। व्यापारी अक्सर किसान के घर से ही माल खरीद ले जाते हैं, जिससे पूरा मुनाफा किसान को मिलता है। अभी ट्रेनिंग में बकरियों की सेहत, देसी इलाज और बैंक लोन जैसी जानकारी दी जा रही है ताकि किसान इसे एक व्यवसाय की तरह चला सकें।






