Bhagalpur के बरारी पुल घाट के पास गंगा नदी में स्टीमर से कचरा गिराने का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ है। यह इलाका विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य का हिस्सा है, जहां नदी में किसी भी तरह का मलबा या गंदगी डालना कानूनन जुर्म है। इस मामले में वन विभाग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए S.P. Singla कंपनी के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। विभाग ने इसे आखिरी चेतावनी बताते हुए कहा है कि दोबारा ऐसी गलती होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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क्या है पूरा मामला और वन विभाग ने क्या कहा?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि निर्माणाधीन पुल की साइट पर एक स्टीमर से सीधे गंगा में कुछ गिराया जा रहा था। इसके बाद DFO Ashutosh Raj ने साइट इंचार्ज को तलब किया। हालांकि, निर्माण एजेंसी ने सफाई दी है कि वह कचरा नहीं, बल्कि ट्रकों के टायरों में फंसी मिट्टी थी जिसे धोया जा रहा था।
वन विभाग ने साफ कर दिया है कि यह संरक्षित क्षेत्र है और यहां किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। विभाग ने 30 जनवरी 2026 से इस इलाके में गश्ती बढ़ाने का भी ऐलान किया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। DFO ने स्पष्ट किया कि अभी फाइनल वार्निंग दी गई है, लेकिन अगली बार एफआईआर दर्ज हो सकती है।
नियम तोड़ने पर कितना लग सकता है जुर्माना?
भागलपुर का यह क्षेत्र Vikramshila Gangetic Dolphin Sanctuary के अंतर्गत आता है। डॉल्फिन विशेषज्ञ Prof. S.K. Chaudhary के अनुसार, गंगा में मलबा डालना डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों के लिए जानलेवा है। NGT के नियमों के मुताबिक यहां सख्ती बरती जाती है:
- नदी किनारे से 500 मीटर के दायरे में कचरा डालना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- नियम तोड़ने पर कम से कम 50,000 रुपये का जुर्माना तय है।
- गंभीर मामलों में यह जुर्माना कई लाख रुपये तक हो सकता है।
- बार-बार गलती करने पर कॉन्ट्रैक्टर को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।






