वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करते हुए देश में यातायात व्यवस्था को बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ऐलान किया है कि अगले 5 सालों में देश भर में 20 नए नेशनल वॉटरवे यानी राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित किए जाएंगे। इसका सीधा मकसद सड़कों और रेल नेटवर्क पर दबाव कम करना और सामान ढुलाई को सस्ता बनाना है।
एक और जरूरी खबर: Budget 2026: 7 नई बुलेट ट्रेन और 5 जलमार्ग का ऐलान, पटना और वाराणसी के लिए खुशखबरी।
इस नई योजना की शुरुआत ओडिशा से की जाएगी, लेकिन इसका बड़ा असर बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी देखने को मिलेगा। सरकार ने जलमार्गों और बंदरगाहों के विकास के लिए भारी भरकम बजट भी तय किया है, जिससे व्यापार और रोजगार दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
कब और कैसे शुरू होंगे ये नए रास्ते?
सरकार ने तय किया है कि अगले 5 सालों के अंदर इन 20 नए जलमार्गों को चालू कर दिया जाए। इसकी शुरुआत ओडिशा में नेशनल वॉटरवे 5 (NW5) से होगी। यह नया रास्ता तलचर और अंगुल जैसे खनिज वाले इलाकों को पारादीप और धामरा बंदरगाहों से सीधा जोड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी के रास्ते सामान भेजना सड़क या ट्रेन के मुकाबले काफी सस्ता पड़ता है। अभी लॉजिस्टिक्स का खर्चा जीडीपी का लगभग 8% है, जिसे सरकार कम करना चाहती है। इसके अलावा, दूरदराज के इलाकों को जोड़ने के लिए ‘सी-प्लेन’ (Seaplane) सेवा को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिसके लिए सरकार ने फंड की व्यवस्था की है।
पटना और वाराणसी के लोगों के लिए क्या है खास?
इस बजट में बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए भी अच्छी खबर है। सरकार ने फैसला लिया है कि वाराणसी और पटना में अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए विशेष ‘जहाज मरम्मत केंद्र’ (Ship Repair Ecosystem) बनाए जाएंगे। इसका मतलब है कि गंगा नदी के रास्ते चलने वाले जहाजों की मरम्मत और देखरेख अब इन्हीं शहरों में हो सकेगी, जिससे यहाँ रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
बजट में इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए पैसों का भी पूरा इंतजाम किया गया है:
- मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड: जलमार्गों और पोर्ट के लिए 25,000 करोड़ रुपये का फंड बनाया गया है।
- शिपबिल्डिंग स्कीम: जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने करीब 45,000 करोड़ रुपये की अलग-अलग योजनाएं रखी हैं।
- सागरमाला 2.0: बंदरगाहों को आधुनिक बनाने के लिए अगले 10 सालों में 40,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।






