भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते ने भागलपुर के रेशम उद्योग में नई जान फूंक दी है। 7 फरवरी 2026 से लागू हुए इस फैसले के तहत अब भारतीय सिल्क उत्पादों पर अमेरिका में कोई टैक्स नहीं लगेगा। पहले निर्यात पर भारी शुल्क लगता था, जिससे कीमतें बहुत बढ़ जाती थीं। अब जीरो ड्यूटी होने से भागलपुर के बुनकरों और व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा। अमेरिकी बाजार में भारतीय रेशम की मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या है नया समझौता और कितना होगा फायदा?
पहले भारतीय रेशम को अमेरिका भेजने पर 25% बेस टैरिफ और 13% पेनल्टी देनी पड़ती थी। इस तरह कुल मिलाकर खरीदार के लिए कपड़ा 63% तक महंगा हो जाता था। अब यह टैक्स पूरी तरह हटा दिया गया है। इंडियन सिल्क एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ISEPC) के चेयरमैन डॉ. बिमल मावंडिया ने बताया कि इस छूट से अमेरिका को होने वाला निर्यात 600 करोड़ रुपये से बढ़कर 1000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। यह समझौता सीधे तौर पर एमएसएमई और किसानों को लाभ पहुंचाएगा।
चीन और बांग्लादेश को मिलेगी कड़ी टक्कर
इस समझौते के बाद भारतीय सिल्क दुनिया भर में सबसे सस्ता और प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। जहां भारत के लिए टैक्स 0% हो गया है, वहीं दूसरे देशों को अब भी भारी टैक्स देना पड़ेगा। इससे अमेरिकी खरीदार अब चीन या वियतनाम के बजाय भारत से कपड़ा खरीदना पसंद करेंगे। आंकड़ों में देखें तो फर्क साफ़ नज़र आता है:
| देश | टैक्स (Duty) |
|---|---|
| भारत | 0% (Zero) |
| चीन | 35% |
| बांग्लादेश | 20% |
| वियतनाम | 20% |
भागलपुर के लिए रोजगार के नए अवसर
भागलपुर का सिल्क क्लस्टर इस फैसले का सबसे बड़ा लाभार्थी है। डॉ. मावंडिया, जो खुद भागलपुर के निवासी हैं, उन्होंने बताया कि टैक्स हटने से ऑर्डर बढ़ेंगे जिससे हजारों बुनकरों, छोटे उद्यमियों और महिला कारीगरों को रोजगार मिलेगा। यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देगा और भागलपुर के रेशम को एक नई वैश्विक पहचान दिलाने में मदद करेगा। स्थानीय निर्यातकों ने बताया कि अमेरिका से पूछताछ बढ़ गई है और उन्होंने अपनी नई रेट लिस्ट पर काम शुरू कर दिया है।






