भागलपुर से लगभग 70 बसें असम में होने वाले चुनाव के लिए ड्यूटी पर भेजी जा रही हैं। 9 अप्रैल 2026 को असम में होने वाले चुनाव को देखते हुए इन बसों को रवाना किया गया है। चुनाव आयोग के निर्देश पर बिहार के विभिन्न जिलों से गाड़ियां मंगवाई जा रही हैं जिसमें भागलपुर की इन बसों की बड़ी भूमिका है। इस कदम से स्थानीय परिवहन सेवा पर सीधा असर पड़ने की संभावना है जिससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को बस स्टैंड पर ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है।
बस मालिकों को कितना किराया और भत्ता मिलेगा?
चुनाव आयोग (ECI) के नियमों के अनुसार चुनाव ड्यूटी में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों के मालिकों को सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जाता है। इसमें पेट्रोल, डीजल और तेल के खर्च के साथ-साथ छोटी मरम्मत का खर्च भी शामिल होता है। अगर कोई गाड़ी एक दिन में 8 घंटे या उससे ज्यादा ड्यूटी करती है तो उसे पूरे दिन का किराया मिलेगा। वहीं 4 से 8 घंटे की ड्यूटी पर आधा किराया देने का प्रावधान है।
- गाड़ी रिलीज होने के दिन ही डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर को कैश पेमेंट या एडवांस की व्यवस्था करनी होती है।
- ड्राइवर और खलासी को हर दिन 250 रुपये का भोजन भत्ता अलग से दिया जाएगा।
- गाड़ी मालिकों को आमतौर पर ड्यूटी खत्म होने के एक महीने के भीतर भुगतान कर दिया जाता है।
- सरकारी और कमर्शियल गाड़ियों को चुनाव ड्यूटी में प्राथमिकता दी जाती है।
लोकल ट्रांसपोर्ट और यात्रियों पर क्या होगा असर?
भागलपुर से एक साथ 70 बसों के बाहर जाने से शहर और ग्रामीण इलाकों के रूट पर बसों की कमी हो जाएगी। असम सरकार ने चुनाव के लिए कुल 3,500 गाड़ियों की मांग की थी जिसमें बिहार से भी सहायता ली जा रही है। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने और सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए बसों की जरूरत पड़ती है। हालांकि इस दौरान आम जनता को होने वाली परेशानी को कम करने की कोशिश की जा रही है लेकिन बस स्टैंडों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ना तय है।
असम में चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि मतदान के दिन सभी कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों को पेड हॉलिडे यानी सवैतनिक अवकाश दिया जाएगा। इसके अलावा फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स के जवानों को भी चुनाव ड्यूटी में तैनात करने की तैयारी चल रही है जिसे लेकर कुछ आपत्तियां भी दर्ज की गई हैं।






